लियेंडर पेस, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट और टेनिस दोनों को नया दर्जा दिया, आज के दौर में एक बड़ी राजनीतिक घटना से जुड़े हैं। बुधवार, 31 मार्च 2026 को, पूर्व खिलाड़ी ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की। यह वक्त अत्यंत संवेदनशील था क्योंकि इसकी सीधी झंझाकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से होती हुई थी। नई दिल्ली में भाजपा के मुख्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कई शीर्ष नेता मौजूद थे।
राजनीतिक वापसी और पुराने साथियों का विरोध
यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी खेल界 के दिग्गज को राजनीति से जोड़ा गया है, लेकिन यह मोड़ थोड़ा अनोखा है। नितीन नांबीर, राष्ट्रीय अध्यक्ष of भाजपा के रणनीतिक दृष्टिकोण में यह एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है। अगर आप याद करें, तो अक्टूबर 2021 में जब तृणांमूल कांग्रेस ने गोवा में अपना प्रवेश कराया था, तब यह दृश्य कुछ और ही था। वहाँ ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री of पश्चिम बंगाल मौजूद थीं। अब, बस पाँच साल बाद, वह व्यक्ति दूसरे दल के ध्वज के नीचे खड़ा है। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत नहीं है; यह पूरे क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को हिला सकता है।
इस फैसले की वजहें क्या थीं? शायद यह भी एक बात हो सकती है कि 2021 के बाद से पार्टी की स्थिति कुछ कमजोर पड़ गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि 'बेङ्गी ताकत' या 'बेङ्गी आत्मा' जैसे नारे अब उतने असरदार नहीं रह गए हैं। जब लियेंडर ऐसे व्यक्ति हैं जो खुद को 'ग्लोबल बेङ्गी' के रूप में पेश किए गए थे, तो उनका चला जाना एक संदेश देता है।
कोलकाता की मिट्टी और नए अवसर
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि लियेंडर पेस की जड़ें कोलकाता से जुड़ी हैं। यही उनके लिए भाजपा के लिए खास बनाता है। शहर के उस वर्ग में, जहाँ युवा मतदाता अपनी पहचान ढूंढ रहे हैं, उनमें पेस एक चेहरा बन सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे संभावित रूप से किसी महत्वपूर्ण सीट से मैदान में उतर सकते हैं। शायद उन्हें किसी सीट पर प्रत्याशी बनाया जाए जिससे सीधे तौर पर टीएमसी के किसी मंत्री के साथ टक्कर हो। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या वे ख़ुद चुनाव लड़ेंगे या केवल स्टार कैम्पेनर के रूप में काम करेंगे।
यहाँ बात यह भी जरूरी है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से लोगों को आकर्षित किया है। साहित्यकार से लेकर स्पोर्ट्सस्टर्स तक। पेस को लाकर उनका इरादा केवल एक नाम डालना नहीं है, बल्कि एक संस्कृति बनाना है।
खेल संसार में उनकी उपलब्धि
राजनीति में उनका भविष्य चाहे कुछ भी हो, खेल में उनका योगदान अनछुआ है। यदि हम गिनती करें, तो उन्हें 1996 एتلान्टा ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुआ था। वह भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जो व्यक्तिगत खेल में ओलंपिक मेडल लाए। कुल मिलाकर उन्होंने 18 ग्रैंड स्लाम खिताब अपने नाम किए हैं—8 मिक्स्ड डबल्स और 10 मेल डबल्स। यह साक्षात एक रिकॉर्ड है।
दावेस कप में भी इनके पास सबसे ज्यादा डबल्स मैच जीतने का रिकॉर्ड है। महेश भुपति के साथ उनका साझेदारी इतिहास बना चुका है। इस प्रकार के करियर के बाद, 2020 में रिटायरमेंट लेने के बाद उनकी ध्यान पूरी तरह राजनीति की ओर मोड़ा गया।
पार्टी नेतृत्व का दृढ़ विश्वास
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति भी दिखाती है कि पार्टी इसे कितना महत्व दे रही है। किरण रिजिजू, केंद्रीय मंत्री और सुकान्त मजूमदार, केंद्रीय मंत्री दोनों ने इस प्रवेश समारोह में हिस्सा लिया। यह संकेत है कि दिल्ली और बैंगलूर के बीच कोई खास समन्वय है।
वर्तमान परिदृश्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे टीएमसी यह चुनौती उठाती है। शायद वे इसे 'परिवर्तन का संकेत' कहेंगे या फिर 'घोटाळेवाद' का सबूत बतायें।
Frequently Asked Questions
क्या लियेंडर पेस स्वयं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?
अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि समाचार सूत्रों के अनुसार, वे कोलकाता की किसी प्रमुख सीट से प्रत्याशी बन सकते हैं। अभी उनकी भूमिका मुख्य रूप से स्टार प्रचारक के रूप में अनुमान लगाई जा रही है।
लियेंडर पेस ने पहले किस पार्टी में प्रवेश किया था?
इनोक्टे 2021 में लियेंडर ने तृणांमूल कांग्रेस (टीएमसी) में प्रवेश किया था। गोवा में हुए एक समारोह के दौरान ममता बनर्जी की उपस्थिति में उन्हें पार्टी का कार्यकर्ता बनाया गया था।
लियेंडर पेस की भाजपा में शामिल होने की तिथि क्या है?
लियेंडर पेस ने 31 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय कार्यालय में अपना प्रवेश किया। यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई।
भाजपा के लिए लियेंडर पेस की भर्ती क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
भाग्यशाली खेल के चैंपियन होने के कारण युवाओं और मध्यम वर्गीय वोट बैंक में उनकी अच्छी पहचान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके द्वारा भाजपा बंगाल के शहरी क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है।