3 मार्च 2026 को रात के आसमान में एक ऐसा दृश्य दिखा जिसे देखने के लिए लोगों ने साल भर इंतजार किया — एक पूर्ण चंद्रग्रहण, जिसने चाँद को खून जैसा लाल रंग दे दिया। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू हुआ और शाम 6:47 बजे समाप्त हुआ, जिसका सबसे घना चरण शाम 5:58 बजे आया। इस बार चाँद पूरी तरह धरती की छाया में घुल गया — एक ऐसी घटना जो सिर्फ कुछ वर्षों में एक बार होती है।
क्या हुआ था आसमान में?
चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूरज और चाँद के बीच आ जाती है। सूरज की किरणें धरती के वायुमंडल से टकराती हैं, नीले रंग को बिखेर देती हैं, और लाल रोशनी को चाँद की ओर झुका देती हैं। इसलिए चाँद लाल दिखता है — इसीलिए इसे 'ब्लड मून' कहते हैं। इस बार ग्रहण का आंकड़ा 1.155 था, जिसका मतलब है कि चाँद पूरी तरह धरती की अंधियारी छाया (उम्ब्रा) में घुल गया। ऐसा गहरा ग्रहण आमतौर पर सिर्फ हर 3-4 साल में आता है।
भारत में यह दृश्य बहुत अलग तरह से दिखा। चाँद शाम के समय उगा, और ग्रहण का बड़ा हिस्सा तो पहले ही समाप्त हो चुका था। इसलिए दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई जैसे शहरों में लोगों ने सिर्फ अंतिम 15-20 मिनट तक देखा। लेकिन पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में लोगों ने ग्रहण के अंतिम चरण को देखा। जैसे कि कोलकाता में 5:39 बजे से शुरू होकर 6:48 बजे तक, जबकि दिल्ली और मुंबई में सिर्फ 6:33 से 6:47 बजे तक।
दुनिया भर में देखा गया अद्भुत दृश्य
यह ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, रूस और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में भी दिखा। अमेरिका में यह शाम 6:04 बजे (EST) के आसपास दिखा, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह रात के 11:30 बजे के आसपास। दुनिया भर के आकाश दर्शकों ने इसे बिना किसी उपकरण के देखा — यह बिल्कुल सुरक्षित था। बस एक बड़ा दूरबीन या द्विदृष्टि लेंस लगाने से लाल रंग का विस्तार और अधिक साफ दिखता था।
लेकिन इस ग्रहण का सबसे अद्भुत पहलू कुछ लोगों ने ही देखा — सेलेनेलियन। यह एक ऐसा दृश्य है जहाँ एक ही समय पर चाँद (पश्चिम में डूबते हुए) और सूरज (पूर्व में उगते हुए) दोनों दिख रहे हों। खगोलीय नियमों के अनुसार, यह असंभव है — चाँद और सूरज एक दूसरे के ठीक विपरीत होते हैं। लेकिन जब धरती का वायुमंडल लाल रोशनी को टेढ़ा कर देता है, तो यह असंभव दृश्य संभव हो जाता है। यह दुर्लभ घटना सिर्फ उन जगहों पर दिखी जहाँ सूरज और चाँद दोनों क्षितिज के बहुत नीचे थे — जैसे कि उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिण एशिया के कुछ तटीय क्षेत्रों में।
हिंदू धार्मिक अनुष्ठान और विश्वास
इस दिन को हिंदू धर्म में विश्वासु फाल्गुन पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। ग्रहण के दिन भोजन करना निषेध है — लेकिन अगर कोई असमर्थ है, तो यावगु या कंजी जैसा हल्का भोजन दोपहर 2-3 बजे तक ही लिया जा सकता है। ग्रहण के दौरान कोई भी भोजन नहीं होना चाहिए। ग्रहण के बाद, मोक्ष स्नानम (अनुष्ठानिक स्नान) किया जाता है, और उसके बाद ही नया भोजन बनाया जाता है।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिनका जन्म पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र या सिंह राशि में हुआ है, उन्हें विशेष आध्यात्मिक उपाय करने की सलाह दी जाती है — जैसे दान, जाप या शिवलिंग पर जल चढ़ाना। ये रिवाज आज भी भारत के ग्रामीण और आध्यात्मिक समुदायों में जीवित हैं।
क्यों है यह ग्रहण खास?
यह ग्रहण सिर्फ लाल चाँद दिखाने के लिए नहीं था। इसकी लंबाई (11 घंटे 31 मिनट) इसे 2026 का सबसे लंबा चंद्रग्रहण बनाती है। इसका आंकड़ा 1.155 इतना उच्च है कि चाँद का बहुत बड़ा हिस्सा धरती के छाया के गहरे भाग में गया — जिससे रंग अधिक गहरा और लाल बना।
इससे पहले, 2022 में नवंबर का ग्रहण दुनिया भर में देखा गया था, लेकिन उसका आंकड़ा 1.037 था। इस बार ग्रहण का विस्तार अधिक था, और इसके साथ सेलेनेलियन का दृश्य जुड़ गया — जो लगभग 100 साल में एक बार ही होता है। जापान के खगोलविद डॉ. हिसामात्सु ने कहा, "इस ग्रहण में विज्ञान और सांस्कृतिक विश्वास दोनों एक साथ जुड़ गए। यह सिर्फ एक आकाशीय घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने इंसानों को अपने आसमान के प्रति नया आदर दिखाया।"
अगला क्या है?
अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 2027 के अगस्त में होगा, लेकिन वह भारत में नहीं दिखेगा। 2028 में 12 अगस्त को एक और बड़ा ग्रहण आएगा, जिसका आंकड़ा 1.25 होगा — जो इस बार से भी गहरा होगा। लेकिन सेलेनेलियन जैसी दुर्लभ घटना के लिए, हमें अगले 50 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या चंद्रग्रहण के दौरान चाँद का लाल रंग वास्तव में खून के रंग जैसा होता है?
नहीं, यह खून नहीं है — यह सूरज की लाल रोशनी का विक्षेपण है। धरती का वायुमंडल नीली रोशनी को बिखेर देता है, और लाल रोशनी चाँद तक पहुँच जाती है। इस ग्रहण में रंग गहरा लाल और कभी-कभी नारंगी था, जो वायुमंडल में धूल और मौसम के अनुसार बदलता है।
क्या भारत के सभी हिस्सों में यह ग्रहण दिखा?
नहीं। ज्यादातर शहरों में चाँद ग्रहण के अंतिम चरण के दौरान ही उगा, इसलिए सिर्फ 15-20 मिनट का दृश्य देखा जा सका। उत्तर-पूर्व भारत और अंडमान जैसे स्थानों पर ग्रहण के अंतिम 45 मिनट दिखे। दक्षिणी भारत में चेन्नई और हैदराबाद में देखने का समय थोड़ा अधिक था।
सेलेनेलियन क्या है और यह क्यों दुर्लभ है?
सेलेनेलियन एक ऐसा दृश्य है जहाँ सूरज और चाँद एक ही समय पर दिखते हैं — जबकि खगोलीय नियमों के अनुसार यह असंभव है। यह तभी होता है जब वायुमंडल की अपवर्तन घटना लाल रोशनी को टेढ़ा कर देती है। इसके लिए विशिष्ट ज्यामितीय शर्तें चाहिए — जैसे कि सूरज और चाँद दोनों क्षितिज के बहुत नीचे हों। ऐसा केवल 2-3 बार सदी में होता है।
क्या ग्रहण के दौरान फोटोग्राफी करना सुरक्षित है?
बिल्कुल सुरक्षित है। चंद्रग्रहण के दौरान कोई आँखों के लिए खतरा नहीं होता — यह सूर्यग्रहण की तरह नहीं है। आप बिना किसी फिल्टर के कैमरा लगा सकते हैं। अधिकांश फोटोग्राफर ने इस बार लाल चाँद की विस्तृत तस्वीरें लीं, जिनमें छाया का स्पष्ट सीमांकन दिख रहा था।
हिंदू धर्म में ग्रहण के बाद मोक्ष स्नान क्यों किया जाता है?
पुराणों के अनुसार, ग्रहण के दौरान अशुद्धि का असर होता है। मोक्ष स्नान इस अशुद्धि को धो देता है। यह एक आध्यात्मिक शुद्धिकरण का रूप है — जैसे कि भारतीय रीति में अशुद्ध चीजों के बाद स्नान करना। यह वैज्ञानिक नहीं है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अगला ब्लड मून कब दिखेगा और क्या यह भारत में दिखेगा?
अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 12 अगस्त, 2028 को होगा, जिसका आंकड़ा 1.25 होगा — यह इस बार से भी गहरा होगा। यह भारत में दिखेगा, और उत्तरी और पूर्वी भारत में इसका दृश्य बेहतर होगा। लेकिन सेलेनेलियन जैसी दुर्लभ घटना के लिए, हमें अगले 50 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।